सृष्टि रचना

सभी जानते हैं कि, ब्रह्मा जी ने इस सृष्टि की रचना की है परंतु जब पहलेे-पहल उन्होंने सृृष्टि रची तो उसमें विकास था ही नहीं । न किसी का जन्म और न ही किसी की मृत्यु होती थी ।

पहले ब्रह्मा जी ने जब सृष्टि रचना का संकल्प लिया तो उनके
मन से मरीचि , नेत्रों से अत्रि ,मुख से सरस्वती, कान से पुलस्तय, नाभि से पुलह , हाथ से कृतु , त्वचा से भृगु , प्राण से वशिष्ठ , अंगूठे से दक्ष, तथा गोद से नारद उत्पन्न हुए ।
इसी प्रकार उनके दाएँ स्तन से धर्म , पीठ से अधर्म, ह्रदय से काम, दोनो भौंहों से क्रोध, तथा  नीचे के ओंठ से लोभ उत्पन्न हुए । इस तरह यह संपूर्ण जगत ब्रह्मा जी के मन और शरीर से उत्पन्न हुआ ।
एक कथा के अनुसार ब्रह्मा जी अपनी मानस पुत्री सरस्वती पर मोहित हो गए और उन्हें अपनी पत्नी बना लिया जिससे मनु का जन्म हुआ। जब जल प्रलय हुआ और पृृथ्वी पर जीवन मृृत्यु का चक्र चलना शुरू हुआ  तो मनु पृथ्वी के प्रथम मानव बनेें । इसलिए मनु को आदिमानव भी कहा जाता है।
First man in world Manu who started life

मनु का विवाह शतरूपा से हुुुआ । दोनों के पांच संतानें हुई :-
उत्तानपाद , प्रियव्रत , आकूति , देवहूती और  प्रसूति  ।

मनु की तीनों पुत्रियों आकूति, देवहूती और प्रसूति से ही संसार के मानवों में वृद्धि हुई । आकूति का विवाह रूचि प्रजापति से  प्रसूति का दक्ष प्रजापति के साथ तथा देवहूूती का विवाह
प्रजापति कर्दम के साथ हुआ था।

मनु के दो पुत्र उत्तानपाद और प्रियव्रत हुए । उत्तानपाद की दो पत्नियां सुनीति और सुरुचि थी । जिनसे उन्हें दो पुत्र हुए । सुनीति से ध्रुव और सुुरुचि सेे उत्तम ।

मनु के दूसरे पुत्र प्रियव्रत ने विश्वकर्मा की पुत्री बहिष्मति से विवाह किया था और दोनों के दस पुत्र थे ।


इस तरह मनु की संतान होने के कारण वे मानव कहलाए ।




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